How do pre engineered buildings fare for agricultural purposes

किसान जब खेती करता है तो उसकी सबसे बड़ी पूंजी उसकी खेत, उसके द्वारा उपजाए गए फसल और उनके संसाधन होते हैं. मौजूदा दौर में भारत कृषि क्षेत्र से जुड़े कई अहम बदलावों के दौर से गुजर रहा है जिसका सकारात्मक प्रभाव कृषि और किसानों पर पड़ रहा है. ये अहम बदलाव तकनीक से लेकर बदलते विभिन्न पद्धति से जुड़े हैं. 


1960 के दौर में जब देश में हरित क्रान्ति की शुरुआत हुई थी तो इसका सीधा असर खेती और फसल की गुणवत्ता पर पड़ा था. उस वक्त यह कहा जा रहा था कि फसल की गुणवत्ता में हुए बदलाव से ही भारत में कृषि की आगामी तस्वीर बदल जायेगी, लेकिन जैसे जैसे समय का पहिया बढ़ा वैसे वैसे सभी को यह अहसास हो गया कि हरित क्रान्ति कृषि बदलावों की महज शुरुआत भर थी. 


तकनीक के बेहतर होने से फसल बोने से लेकर उसे संरक्षित रखने तक में भी कई अहम क्रांतिकारी बदलाव हुए. 


हरित क्रान्ति ने फसल के गुणवत्ता की समस्या का तो समाधान कर दिया लेकिन उसे संरक्षित करने एवं संसाधनों को सहेजने की समस्या उत्पन्न हुई. इस समस्या ने न केवल फसल के उपजाऊ पैमाने पर असर डाला बल्कि प्राकृतिक आपदा ने संसाधनों को भी काफी नुकसान पहुंचाया।


इन सभी समस्याओं का सहजता से निदान पूर्व निर्मित भवनों ने किया जिसे खेतों में बिठाना भी आसान है साथ ही इसे एक जगह से दूसरे जगह ले जाना भी काफी सुगम है. जब तकनीक ने कृषि क्षेत्र को पूर्व निर्मित भवनों का उपहार नहीं मिला था तब प्राकृतिक आपदा, चोरी और जगह की कमी ने किसानों को काफी परेशान किया था। 


कृषि क्षेत्र में पूर्व निर्मित भवनों का महत्त्व ऐसा है जिसे आने वाली सदी तक एक बेहतर और सशक्त विकल्प के रूप में उपयोग किया जाएगा। इन भवनों के निम्नलिखित फायदे किसानों की चिंताएं भी दूर करेगी साथ ही पूर्व निर्मित भवनों के सार को भी भविष्य में क्रांतिकारी स्थान पर ले जाएगी। 


* प्राकृतिक आपदा से सुरक्षा 


पूर्व में कृषि संसाधनों एवं फसलों को संरक्षित करने में काफी समस्याएँ उत्पन्न होती थीं जिसका सबसे अहम कारण बारिश और गर्मी को माना जाता रहा है. पूर्व निर्मित भवनें ऐसी धातुवें से निर्मित होती हैं जिससे न सिर्फ फसल सुरक्षित रहते हैं बल्कि संसाधन जैसे हार्वेस्टर, ट्रेक्टर, मवेशी और अन्य उपकरणों को भी सहेज कर रखा जा सकता है.


*  एक जगह से दूसरी जगह स्थापित करना 


पूर्व निर्मित भवनों को एक जगह से दूसरे जगह पर ले जाना पूर्व के भवनों के मुकाबले सहुलियत भरा है. भारतीय फसल अधिकतर साल के मात्र छह महीने में ही बोए और काटे जाते हैं, ऐसे में जिस माह फसल नहीं होते हैं उस वक्त इस पूर्व निर्मित बह्वानों को आसानी से हटाया और फिर से स्थापित किया जा सकता है. 


* मजबूत और हर मौसम रोधी 


बढ़ते समय के साथ कई समस्याएँ भी बढ़ीं। किसानों और लोगों के खर्च का उन्हें बेहतर परिणाम मिले इसलिए पूर्व निर्मित भवनों को मजबूत और हर मौसम रोधी बनाय जाता है ताकि तमाम विकट परिस्थितयों को ये भवन आसानी से सहन कर सके और किसानों को सहूलियत पहुंचा सके. 


* प्राकृतिक हित 


पूर्व निर्मित भवनें प्राकृतिक हितों को पूरा करते हैं जिसमें पानी की कम खर्च और प्रदूषणहीनता शामिल होती है. पूर्व के कृषि में खेतों में जब फसलों को सहेजने अथवा संसाधनों को सहेजने के लिए भवनों का निर्माण होता था उसमें पानी का ज्यादा उपयोग होता था वहीं इससे प्रदूषण की समस्या भी बढ़ रही थी. पूर्व निर्मित भवनें इन सभी समस्याओं का निदान करने में सक्षम है. 


* कम लागत 


बढ़ती महंगाई के दौर में किसानों के लिए बड़ी चुनौती कम से कम लागत और ज्यादा से ज्यादा मुनाफे की है. परम्परागत निर्माण के मुकाबले पूर्व निर्मित भवन किसानों के खर्चे को 50 फीसदी तक कम करते हैं जिससे किसानों को ज्यादा रकम मुनाफे के रूप में बचती है. पूर्व निर्मित भवनों के निर्माण से हमारे देश के किसान मुनाफे के लिहाज से समृद्ध हो रहे हैं.  


पूर्व निर्मित भवनों के ये फायदे भारत में कृषि विकास को एक नए आयाम पर पहुंचाता है. इन फायदों का सीधा असर किसानों के मुनाफे पर पड़ता है और किसानों को फसल से उचित मुनाफे की उम्मीद बनती है. 

निश्चित तौर पर तत्कालीन और आने वाला दौर पूर्व निर्मित भवनों का है जिसे अब सरकारी मदद के साथ पूरी प्रतिबद्धता से आगे बढ़ाया जा रहा है.  




Best Steel Manufacturing company with Supplies

Construct your own storywall with SRI (A unit of Saraf Real Infra)